अलसुबह, पूछा जो हमने उनसे ये सवाल की बताओ कैसे बीती कल की रात
तो
पहले तो वो हौले से मुस्कुराए और फिर दांतों से होंठ काट कर चुप्पी थाम ली
समझ गया था मैं उनकी मधुर चुप्पी की वजह ठीक उसी वक्त
फिर वक्त काटे न कटा सारी सारी रात ये बात बिल्कुल अलग
जाने क्यों कुछ थके थके से नज़र आए मुझे मेरे सरकार
पता नहीं वक्त ने उनके साथ किए क्या क्या अत्याचार
थकान मिटाने के लिए ही तो गया था मैं कल उनके पास
सुना है इश्क़ से बेहतर होता नहीं किसी भी मर्ज का इलाज
प्रभु को भी थोड़ी चिंता लेने दो इस जगत और समाज की
सुना है हमने की महादेव से बेहतर है कोई काल का वैद्य नहीं
सबकुछ तुम ही तुम करोगे अगर तो भला हम क्या करेंगे
हमें और कुछ नहीं तो कम से कम तुम्हें प्यार ही करने दो
☕ कौनसा ऐसा घर है जहाँ हर दिन चाय नहीं बनती
कौनसा ऐसा घर है जहाँ चाय कहानियाँ नहीं बुनती
मखमली पोशाक में गुलबदन के मन को छूने के लिए...
लफ़्ज़ों को कहने का एक हसीन सलीका भी ज़रुरी है जनाब
गुलाब अगर कायदे से ना पकड़े जाएँ तो कांँटे चुभ जाते हैं बेहिसाब
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