Saturday, October 10, 2026

Hoslers versus Day Scholars


Parallel Worlds: A Poem

The morning bell rings loud and clear,
Two different worlds are drawing near.
One steps off a crowded train,
Shaking off the morning rain,
With dust of travel on their shoes,
And city traffic in their views.

The other rolls right out of bed,
With messy hair and sleepy head,
Just minutes before the class begins,
To skip the breakfast is their sin.

The Day Scholar brings the outside breeze,
Of family dinners, home, and ease.
But packs their bags when shadows fall,
Missing the twilight on the wall,
The late-night tea, the terrace talks,
The midnight laughs and starlight walks.

The Hosteler claims the campus stones,
In crowded rooms they make their homes.
They fight the mess food, share the tears,
And build a bond for future years.
Yet long for kitchens warm and sweet,
And quiet nights on a familiar street.

Two different paths on the same green lawn,
From morning light until the dawn.
One finds a home within the school,
One brings their home to break the rule.
Yet in the hall, they sit as one,
Until the college day is done.

हॉस्टलर्स समझते हैं कि डे स्कॉलर्स outsiders हैं जो कुछ घंटों के लिए इस कैंपस में शान से आते हैं और चले जाते हैं।
वहीं day स्कॉलर्स समझते हैं कि ये हॉस्टलर्स असल में outsiders हैं जो किसी और शहर या गाँव से आकर यहाँ उत्पात मचाकर धूम धाम से शानदार आज़ाद जीवन जी रहे हैं।
बस यही समझ बाँट देती है हमें दो जगत में।

Friday, October 9, 2026

PHILISOPHICAL SCIENCE

Science often fails to understand Literature... 
As if;
Academic success is everything for a creature...

Science says No to this, that and thus comes out with rules and regulations under the guise of discipline and mannerism...

Literature on the other hand goes beyond any mindful mindset or standardised rules through the world of imagery and creation...

One is incomplete without the other and yet for the Lack of Love and respect and appreciation they compete with each other...

 *Just a thought and not a dictum*
*Accept or Reject as per ur system* 
 
😜😊😜

विज्ञान अक्सर साहित्य को समझने में नाकाम रहता है...

मानो किसी जीव के लिए अकादमिक सफलता ही सब कुछ हो...

विज्ञान किसी बात को, किसी विचार को और किसी तौर-तरीक़े को नकारते हुए नियम-क़ानूनों का ऐसा संसार रचता है, जो अनुशासन और शिष्टाचार की आड़ में अपनी जगह बना लेता है...

वहीं दूसरी ओर, साहित्य कल्पनाओं और सृजन की दुनिया के सहारे हर उस सोच और मानकीकृत नियम से परे निकल जाता है, जिसकी सीमाओं में मन को बाँधकर रखा जाता है...

एक के बिना दूसरा अधूरा है, और फिर भी प्रेम, सम्मान और सराहना के अभाव में दोनों एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं...

 _बस, एक ख़याल है, कोई फ़रमान नहीं...!_ 

स्वीकार करें या अस्वीकार,
अपने-अपने सिस्टम के अनुसार...

😜😊😜

Wednesday, September 30, 2026

एहसास ए इश्क़

इश्क़ वो नहीं जो सिर्फ़ हासिल हो…

कुछ मोहब्बतें पाने के लिए नहीं, उम्रभर महसूस करने के लिए होती हैं… ❤️🌸

१. ज्ञानेन्द्रियाँ और स्पर्श, 
२. मानसिक एकाग्रता,
३. स्वीकृति और खुलापन
ये मुख्य आधार होते हैं *महसूस* करने के लिए
इनमें से एक भी ना हो तो *एहसास* पूर्ण नहीं होते 
💯💞💯

उम्रभर ज्ञानेन्द्रियों ने एकाग्र हो महसूस किया है तेरे मधुर स्पर्श को...
दिल खोल कर स्वीकार है वो सालभर में एक बार पलभर का मिलन...
~
ज़िंदगी ख़्वाब ही सही, जी लेंगे हम..
प्यार के दो बोल ही सही, पी लेंगे हम..
सनम तेरी कसम ❤️‍🔥

एहसास और महसूस में बस फ़र्क है इतना
"वो पास न होकर भी मेरे पास बहुत है"

या यूँ समझो कि;
"एक रूह में उतरा है, एक जिस्म छू के गुज़रा है"

या यूँ कह दो 
"कि वो ज़ुबाँ तक नहीं आता, पर आँखों में दिखता है"

ज़मीन (मिसरा) तो एक ही है पर आसमाँ अलग है 

Saturday, September 26, 2026

Love or Lust

*Is Spirit Loving in nature or is it stoic?

Spirit has to be loving in nature or else it's just a knowledgeable and pretentious state of mind.

Surely, soul has no gender but then our God given body has a definite gender.

Think of a feminist world where there are no men; only women 
or
Think of a masculine world where there isn't any women.

What a dull, listless and pathetic world it would be!

God is unique and so is His creation. Unity in Diversity is the spice of life. 🧬 

No, I am not at all embarrassed of my being, my sexuality, my basic instincts, my natural urge and desires, are you?

हाँ, मेरा शरीर मर्द का है और मुझे मेरे प्रभु ने मुझे काम वासना, मोह माया, रति अहंकार के साथ बनाया है। 
उसी प्रभु ने मुझे आत्म ज्ञान और आत्मा भी दी है जो मुझे काम क्रोध मोह माया अहंकार का गुलाम होने से रोकती है। अति सर्वत्र वर्जियते। फिर चाहे वो ना नुकुर से भरी नास्तिकता हो या भोग विलास से भरी आस्तिकता हो।

Balance ⚖️ is the virtue of living a balanced life and you being a human being born out of Love which people term or tag it as Sex or Lust, you must be aware of it.

I know you are aware, my twin soul.
💘

Thursday, September 24, 2026

दीवाने की दीवानगी

बरसात में कुछ कुछ होता है ना
कल हो ना हो पर आज तो होता है ना 
क्या होता है ये कभी किसी से मत पूछना
होते होते ही तो प्यार जवाँ होता है ना 

प्यार जवाँ भी हुआ और परवान भी चढ़ा,
जवानी दीवानी भी हुई और सर भी चढ़ी,
प्रौढ़ अवस्था में वही प्यार इश्क़ बन गया,
देखते हैं वृद्ध अवस्था क्या गुल खिलाती है

वो कहती है कि बातों से अब भी प्रेम की महक आती है,
बरसात आज भी आहट बन उस महक को छेड़ जाती है

Uffff... ये प्यार, ये जज़्बात, ये हालात.. 
बेशुमार है इश्क़ पर सनम साथ नहीं

उसकी ख़ामोश ज़ुबान भी वो कह देती है मुझसे जो उसके अल्फाज़ चाहकर भी कह नहीं पाते...,

अकेले में होंठ मिलते हैं जब हमारे तो बिन कुछ कहे ज़ुबान टटोल लाती है राज़ सारे के सारे..!!

कर्तव्य और अनुशासन ही पहचान है सच्चे आशिक़ों की;
वरना तो कौन रोक सका है भला दो प्रेमियों को मिलने से

ख़्वाबों को हकीक़त बनने में वक़्त तो लगता ही है,
कौन कहता है की सवेरा होने में वक़्त नहीं लगता।

~दीवाना वारसी 

दीवाने की दीवानगी भरी एक पेशकश - कबूल फरमाइए हुजूर

Thursday, August 27, 2026

Shower Love

Dark clouds hovering all over my thirsty head
Gossamery symbol of distant love thread

कौन कहता है शब्दों का मोल नहीं होता...,

एक हाँ या ना में किसी की पूरी दुनिया बदल जाती है..!!

"हर शायरी,
"किसी ना किसी के लिये, एक "गुमनाम खत है..

"जो किसी के, घर के पते पर नहीं, "मन की, दहलीज "पर खुलती है..
 
फासला दिल से ना हो...
बस यही दुआ करना...!!

कभी यादों में तो....
कभी ख्वाबों में मिला करना...!!!

दिली जज़्बातों को फ़क़त लफ्फाजी समझने की भूल ना करना...,

हालात चाहे जैसे भी हों दिमाग से पहले हमेशा दिल की सुनना..!!

Thursday, August 13, 2026

The Goal

आना निश्चित - जाना निश्चित
देश-काल-परिस्थिति अनिश्चित
निश्चित-अनिश्चित की यात्रा सुनिश्चित
सुख-दुःख के क्षणों में मनवा परीक्षित
आनंद रहता सच्चिदानंद में सुरक्षित

रिटर्न टिकट कन्फर्म है सबका
कैंसल कोई नही करवा सकता,
इसलिए जीवनरूपी यात्रा का पूरा आनंद लिजिए...मस्त रहिए 

Friday, July 10, 2026

इच्छाओं से अनिच्छा का जगत


A Whatsapp message politely greets you and says:
Limited Desires,
Unlimited Peace.
On the face of it the bookish WhatsApp University message of knowledge appears to be a visionary wisdom but doesn't seem to be practical or pragmatic in real life execution of it.

Let's analyse the phenomenon:
No Desires,
No Life - Only Breaths
 How?
1. Desires are quintessential part of life.
2. Desires don't disturb our peace but their fulfilment or non-fulfilment does.
3. Fulfilled desires bring happiness.
4. Unfulfilled desires bring sorrow.
5. To wish or to desire is quite natural, quite human but to get stuck with its fulfilment is obstinacy.

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन 
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि
            ~ श्लोक from गीता 

अर्थ:
मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल पर नहीं। इसलिए, फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य करते रहना चाहिए।
व्याख्या:
१. कर्मों का जन्म इच्छाओं से ही होता है वर्ना तो मनुष्य अकर्मण्य हो समाधिस्थ या स्थित प्रज्ञ हो संतत्व प्राप्त कर सकता है।
2. सामान्य सामाजिक मनुष्य का सिद्ध तपस्वी हो जाना कोई किताबी ज्ञान होने की बात नहीं।
3. अकर्मण्यता का मतलब आलस्य नहीं हो सकता
4. कर्म करने या न करने (कर्मण्यता, अकर्मण्यता या आलस्य) में भी कोई आसक्ति नहीं होनी चाहिए।

तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा,
दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँ इतने हिजाबों में मिलें
                           ~अहमद फ़राज़ 

हाँ...अगर किसी की किसी से मिलने की या मिलन की इच्छा ही न हो तो बात अलग।

एक साधारण मनुष्य होने के नाते मेरी तो इच्छाएँ हैं और मरते दम तक रहेंगी। हाँ, इच्छाओं की पूर्ति होने या ना होने पर मेरा कोई ज़ोर, हक़ या काबु नहीं है - ये सत्य मुझे पूर्णतः स्वीकार है।

इच्छाओं से उपजे कर्मों से फ़ल की प्राप्ति होनी ही चाहिए या होगी ही - ऐसी भी मेरी कोई इच्छा नहीं और शायद इसीलिए मेरी इच्छाएँ मुझे विकृत, विफल या अशांत नहीं करतीं।

.        
.   ख्वाब झूठे है और ख्वाहिशें 
. अधूरी है पर जिंदा रहने के लिए 
.    कुछ गलतफहमियां भी तो 
.                जरूरी हैं l

प्रेम से प्रेम के लिए प्रेम बना रहे
🫶🤌🫶
[अगर कोई आपसे मन की बात साझा ( Share) करता है तो...
समंदर बनना समाचार पत्र (Newspaper) नहीं...!!]


Thursday, June 25, 2026

Nature


तुम नारी - में पुरुष
तुम हुस्न - मैं आशिक
तुम चाँद - मैं सूरज
तुम धरती - मैं गगन
इश्क़ मगर हमें एक कर देता है उस एक से
जो शक्ति भी और है शिव भी

लगता है कि ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है हम में - तुम में...,
~
शायद इसीलिए हम मिलते तो हैं क्षितिज पर मिलन हमारा होता नहीं..!!

एक बारिश ही है जो गरजते आसमान को ज़मीन से मिलाती है 
देखो ना दिल की धरती कैसे खिल उठती है और महक जाती है

संवाद, संवाद केवल एक बातचीत का माध्यम न होकर,
एक ऐसा मानसिक पूल है जो मनुष्य को मनुष्य से जोडता है....
🫶💘🫶
कैसे, कब, कहाँ, क्यों ये तो खैर प्रेम ही तय करता है

नमस्कार 🙏

Wednesday, June 17, 2026

WhatsApp की महिमा

WhatsApp हँसाता भी है
  व्हाट्सएप रुलाता भी है

कभी बैठे-बिठाये झगड़े-टंटे कराए ये ऐप
तो कभी उमंग और उत्साह से भर जाए ये ऐप 

रोमांचित कर जाना तो जैसे इसके बाएँ हाथ का खेल
कसम से, अफ़वाह फैलाने में भी नहीं इसका कोई मेल 

ज्ञान अज्ञान का तो जैसे समुचित भंडार है इसके पास
खोल कर ना देखूँ इसे तो मानसिक यंत्रणा और त्रास 

आदि हो चुका हूँ अगर में इसका तो इसमें इसकी कोई खता नहीं
जलती शम्मा पर मर मिट जाना क्या परवाने का सनातन धर्म नहीं

WhatsApp तुम सलामत रहो, तुम जियो हज़ारों साल
हम दीवानों के पास न डाटा की कमी ना समय का अकाल

*जय हो तुम्हारी ओ मीडिया के लाल*
😊👍😊

Monday, June 15, 2026

संवाद

Flowing river does force the stone to roll around with her. The edges of rolling stone 🪨are constantly worn away, chipped, and smoothed down.

बहती नदी के प्रवाह (बल) से निरंतर लुढ़कने से पत्थर अपने स्रोत से आगे बढ़ते हुए अधिक गोल और चिकने हो जाते हैं।
Having someone or something does not necessarily mean physical proximity or closeness. Enjoyment can come from someone or something far away out of totally mental or spiritual presence too.

किसी वस्तु या किसी इंसान से चरम आनंद पाने के लिए ज़रूरी नहीं कि वो रूप से पास हो या नज़दीक हो। आनंद किसी दूर बैठे इंसान या चीज़ से भी मिल सकता है। चरम आनंद के लिए उस वस्तु या इंसान की सिर्फ मानसिक या आध्यात्मिक मौजूदगी भी काफ़ी होती है।

*आनंदित रहने के लिए हर संभावित तरीके से आनंद देते रहिये और लेते रहिए* 
💘🫶💘😜💘🫶💘
जय श्री महाकाल 
🙏🌹🙏
हर किसी का हर चीज़, हर शय, हर स्थिति को देखने का अपना-अपना नजरिया होता है मेरी जान,
हर सिक्के के यूँ तो दो ही पहलू होते हैं और मुझे तो हर पहलू में तू ही तू नजर आती है मेरी जान,

सिक्के का एक तीसरा पहलू भी होता है जिसमें न चित तेरा न पट मेरा होता है(कोर) मेरी जान,
सही-ग़लत, तेरा-मेरा, अपने-पराये के पार होता है ये ज़हीन-ओ-हसीन पहलू मेरी जानेमन मेरी जान...

उलट-पलट कर देख लो ज़िंदगी की ये हसीन फितरत - हर चीज, हर शय, हर पहलू, हर स्थिति में तुम्हें दिखाई देगा इश्क़-ओ-जुनून का दिल हिला देनेवाला ग़ज़ब का तूफ़ान 
💘💘💘🫶💘💘💘

*हर हर महादेव*
शिव शंभू - शिवोsssहम

मनुष्य का मन सदियों से एक जैसा ही सोचता-समझता आया है
मनुष्य के मन का कोई लिंग, प्रकार या आकार नहीं ना होता 
स्वयं के मन को पढ़ लो तो जगत के मन को आसानी से समझ लोगे
मन के ईश हो जाओगे तो मन ईश में लीन हो स्वामी हो उठेगा

Monday, June 1, 2026

Easy and Difficult

कुछ Choices delete की, कुछ हसरतों को दफ़न किया कल रात मैंने...,
~
सुबह तक तो जैसे कई सारी हकीकतों को कबूल करना आसान हो चला था..!!
🫶🤌🫶
तमन्नाओं को शब्द देकर बयाँ ना करो तो तस्वीरें रंगीन हो जाती हैं...,
~
ज़िंदगी के रुपहले पर्दे पर छाया की माया जैसे साफ नज़र आती है..!!

*ग़ज़ब है कुदरत के ये करिश्में*
   *प्रेम के भूखे सारे नगीने*
It's much easier to fall in love than to stay in love.

Sunday, May 3, 2026

Status Matters


सारे मित्रों के व्हाट्सएप स्टेटस देख के आ रहा हूँ...,
Confused हो अंदर ही अंदर बहुत झुंझला रहा हूँ..!!

कोई कह रहा है कि आँखें बंद कर हीरो पर राइड करे का मज़ा ही अलग है तो कोई कह रहा है कोई छोटे से कितना भी बड़ा हो जाए उसकी अंधभक्ति ना करो 
😘🫢😚
कोई जोर शोर से कह रहा है कि यहां कोई सीरियस बात तो हो ही नहीं सकती तो कोई कह रहा है कि बुद्धुओं की सीरियस नफरत ही तो बुद्धिमानी की सज़ा है
❤️‍🔥❤️‍🩹❤️‍🔥
कोई ज्ञान ध्यान सम्मान से नीट को क्लीयर करने की सलाह दे रहा है तो कोई हौले हौले नीट गटक आगे बढ़ने का मज़ा ले रहा है
👌🫶👌
कोई नाच नाच कर साहित्य का अवलोकन करने को कह रहा है तो कोई गंगा किनारे किसी घाट पर लहरों का मौज ले रहा है 
🤓😎🤓
कोई महाकाल के बुलावे पर ही उज्जैन आ कर ४५ दिन में मनवांछित फल पाने का विज्ञापन कर रहा है तो कोई अपने भोलेपन से भोले को रिझाकर प्रेम के समंदर में तैर रहा है
💘💔💘
कोई बेगानी शादी में नाच नाच कर दूल्हा दुल्हन का अब्दुल्ला हो रहा है तो कोई शादी के बाद चुपचाप सुनने और गलती मानने की समझाइश दे रहा है
🤔🤫🤔
कोई अपने बेटे को सबकुछ देने ज़िद पर अड़ा हुआ नज़र आ रहा है तो कोई हुस्न के जलवे एक नहीं दो नहीं तीन तीन बार उठा रहा है 
🥰🤌🥰
कोई गर्मियों से बचने के लिए घर में ही रहने को कह रहा है तो कोई indoor swimming pool खोलकर दिन में ही आने को कह रहा है
💦 🌊 💦 
कोई जन्मदिन का उत्सव मना रहा है तो कोई अपने परिजन की मौत का शोक मना रहा है 
🥳😔🥳
कोई माँ की ममता और गरिमा का गुणगान कर रहा है तो कोई चापलूसी के दम पर आगे बढ़ने वालों पर फितरे कस रहा है 
🙏😏🙏
अब आप ही बताइए कि मैं किसकी सुनूँ, किसको समझूँ, किस पर एतबार करूं, किसे प्यार करूं, किससे करूं मैं नफरत...सबको अपना सबकुछ मान अपना लूँ तो लोग मुझे रंगीनमिजाज कहकर कसेंगे तंज और मेरी दीवानगी पर हो जाएंगे दंग
🤔🤔🤔
सच कहूँ तो बस दुनिया में रहकर दुनियादारी निभा रहा हूँ 
अंदर तो आ गया हूँ पर अब बाहर निकलना नहीं ना चाह रहा हूँ 
💯🎉💯

Sunday, March 15, 2026

खोजी होय तो तुरंत मिली हूँ, पल भर की तलाश में

बुद्धजीवियों के मुँह से अक्सर सुना है मैंने की खाली हाथ ही आए हो और खाली हाथ ही जाओगे भी...,
बेशक, मोह माया के जाल से बाहर निकल कर संतुष्ट और सुकून भरा जीवन जीने का एक बेहतरीन मार्ग सुझाया है इन परम ज्ञानी ध्यानी लोगों ने..!!

मन मेरा जाने क्यों ये कहता है बारंबार कि कुछ तो होगा जो मेरे साथ आया है और मेरे साथ जाएगा...,
यूँ फिजूल में ही तो नहीं रचता कोई अपने ओंकार की टंकार और हुंकार से ये रसभरा मायावी जगत या सँसार..!!

माना जी माना, दिल से माना कि पूत सपूत तो क्यों धन संचय और पूत कपूत तो क्यों धन संचय...,
पर फिर ये राम रतन धन क्या है जिसे पाकर मीरा दीवानी हुई, कबीर हुए दास और बुद्ध हुए रत्नजड़ित हीरा..!!

मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले
हीरा पायो गाँठ गठियायो, बार-बार बाको क्यूँ खोले

हल्की थी तब चढ़ी तराजू, पूरी भई तब क्यूँ तोले 
सूरत-कलारी भई मतवारी, मदवा पी गई बिन तोले

हंंसा पाए मानसरोवर, ताल-तलैया क्यूँ डोले
तेरा साहब है घर मांही, बाहर नैना क्यूँ खोले

कहै 'कबीर' सुनो भाई साधो साहब मिले गए तिल ओले

Sunday, March 1, 2026

नज़्म ए ज़िंदगी



एक तो तुम इतराती बहुत हो,
उस पर जीने से कतराती भी बहुत हो..

जो ज़िंदगी है ना मेरी, वो बिल्कुल भी इतराती नहीं,
कतराना क्या होता है ये तो जैसे वो जानती ही नहीं,
खुल के जीती है और खुल के जिलाती है,
मन ही मन जलती भी है और जलाती भी है बहुत..

बेहोश ना हो जाऊं कहीं मैं ग़म ए ज़िंदगी के आईने देख,
इसलिए,
दिल खोल के ज़िंदगी के जाम वो चखती भी है और चखाती भी बहुत है..

तुम लेती हो हिसाब पल पल का तो वो देती हैं खिताब हर पल का,
तुम खिंचवाती हो तस्वीर किसी से तो वो खींचती है तस्वीर मेरी..

तुम गर अज़ाब हो तो वो भी नायाब है,
तुम अगर ख़्वाब हो तो वो भी माहताब है 

असल में तो हक़ीक़त को सपनों से भी उतना ही प्यार है जितना इश्क़ हुस्न को ख़ुदा की खुदाई से है,
फिर ये बात अलग की दुनिया की नज़रों में इश्क़ हकीक़त में हो या हो ख्वाब में - दोनों में जुदाई बहुत है।

Friday, February 13, 2026

WINE, WOMEN & WOES

*Wine and Women go hand in hand:*

 शराब का चस्का लगाकर बीवी को मस्का लगा रहे हो हो मियां...,

क्या हुआ!!

आज थिरक-थिरक कर इर्दगिर्द क्यों मंडरा रहे हो मियां..!!
😜
झूम झूम के फरमा रहे हो कि जिनकी बीवी खूबसूरत होती है वो शराब नहीं पीते...,

खामखां..!!

क्यों अपने घर को मयखाना बनाकर शराबियों को बहला-फुसला रहे हो मियां..!!
😜
बीवी की खूबसूरती में अगर शराब का नशा दिखाई देता है तुम्हें...,

वल्लाह..!!

बेवजह क्यों हुस्न को जन्नत का कोइ माल या उपभोग की वस्तु बना रहे हो मियां..!!
😜

दिल से यकीन करना मेरे यार कि सुबह-सुबह बीवी के साथ चाय की चुस्कियाँ लेते हुए ही आया है ये अद्भुत और धीर-गंभीर विचार
❤️‍🔥

गौर फरमाइएगा हुजूर की;

किसी के दिल को ख़ुश रखने के लिए कि गई तारीफ़ को दिल्लगी नहीं चाटुकारिता हैं कहते...,

लत फिर शराब की हो या शबाब की; पीने-पिलाने वाले चाहत की चुस्कियों का हिसाब नहीं लेते..!!

Happy Hug Day
 🤗🫂🤗 
Cheers 🥂

Friday, February 6, 2026

Divine Eyes

नाम होते हैं कुछ रिश्तों के
कुछ रिश्ते नाम के होते हैं
हमारा रिश्ता तूफ़ानी है
जिस्म होकर भी रूहानी है


पियक्कड़ नज़रें
😋😘😋

शुरुआत नज़रों से ही तो हुई थी तब भी
नज़रें ही तो नज़ारों का करवाएगी दर्शन

कदम दो कदम उठेंगे एक दूजे की तरफ
हाथ मिलते ही खिल उठेगा बहार-ए-चमन

कस लेंगे फिर दो प्रेमी एक दूजे को
दिल से मिलेगा दिल मिटाने को चुभन

होंठ मिलेंगे और उंगलियाँ थिरकेंगी
मिलन उत्सव मनाएंगे धरती और गगन 

पर्दे उठाएगी सारी कायनात उन लम्हों में
कोई लिबास ना ढक सकेगा सच की अगन

प्रकृति अपने प्राकृतिक रूप में खिल उठेगी
दो जिस्म एक जान हो जायेंगे मगन

इश्क़ और हुस्न का होगा अदभुत मेल 
ज़र्रा ज़र्रा महसूस करेगा ये मीठी तपन

समय ठहर जायेगा परम आनंद के लिए
शिवशक्ति को होगा कब दिव्य मिलन 

नज़रों से नज़ारों का है ये नमकीन सफ़र 
किस्मत वालों को ही मिलता है ये बदन

Monday, January 19, 2026

कैसे कह दूँ कि मुलाकात नहीं होती

अलसुबह, पूछा जो हमने उनसे ये सवाल की बताओ कैसे बीती कल की रात
तो 
पहले तो वो हौले से मुस्कुराए और फिर दांतों से होंठ काट कर चुप्पी थाम ली

समझ गया था मैं उनकी मधुर चुप्पी की वजह ठीक उसी वक्त
फिर वक्त काटे न कटा सारी सारी रात ये बात बिल्कुल अलग

जाने क्यों कुछ थके थके से नज़र आए मुझे मेरे सरकार
पता नहीं वक्त ने उनके साथ किए क्या क्या अत्याचार 

थकान मिटाने के लिए ही तो गया था मैं कल उनके पास 
सुना है इश्क़ से बेहतर होता नहीं किसी भी मर्ज का इलाज

प्रभु को भी थोड़ी चिंता लेने दो इस जगत और समाज की
सुना है हमने की महादेव से बेहतर है कोई काल का वैद्य नहीं

सबकुछ तुम ही तुम करोगे अगर तो भला हम क्या करेंगे
हमें और कुछ नहीं तो कम से कम तुम्हें प्यार ही करने दो
☕ कौनसा ऐसा घर है जहाँ हर दिन चाय नहीं बनती
कौनसा ऐसा घर है जहाँ चाय कहानियाँ नहीं बुनती

मखमली पोशाक में गुलबदन के मन को छूने के लिए...

लफ़्ज़ों को कहने का एक हसीन सलीका भी ज़रुरी है जनाब
गुलाब अगर कायदे से ना पकड़े जाएँ तो कांँटे चुभ जाते हैं बेहिसाब

~दीवाना वारसी 

Friday, January 9, 2026

शुक्र है शुक्रवार है

तुम हंँसती हो तो मेरी दुनिया खिल उठती है जानम..
😊🌹😊
तेरी एक मुस्कान पर कुर्बान कर दूँ मैं सारा जीवन..

पूछते हैं वो नाज़-ओ-अंदाज से की क्या बात है जी..??

बेबाकी से कहता हूँ मैं की...
वही बात है जो बरसों पहले उस बंगले की सीढ़ियों पर एक महीन मुस्कान, एक झलक, एक नज़र से शुरू हुई थी....

आज तक वो बात खत्म नहीं हुई है...

आज भी वही आग लगी हुई है...

जुम्मा था उस दिन..
शुक्र है की आज भी शुक्रवार है 
शुक्राने ख़ुदा के की सलामत हमारा प्यार है

हाँ जी हाँ *Teen* (किशोर अवस्था) में तेरी एक झलक पाकर ही हुआ मैं १३ *तेरा*

ना स्कूल-कॉलेज एक, ना डोली-बारात एक, फिर भी लगाते हैं आशिक़ अबूझ *फेरा*

अफ़सोस ये कि हम दो आशिक *तीन तेरह हो गए*

[मुहावरा: 'तीन तेरह होना' का अर्थ है 'बिखर जाना' या 'तितर-बितर हो जाना' (जैसे 'घर में सामान तीन तेरह हो गया')]

ताज़्जुब ये के आशिक़ फिर से दो जिस्म एक जान हो गए

शुक्र है ख़ुदा का की बात अब तक बनी हुई है
वर्ना हममें तुममें तो ऐसी कोई बात ही नहीं है

Yesssss......

तो Let's celebrate our home coming someday.. some night
 
दो सितारों का हो मधुर मिलन किसी दिन, किसी रात...

आमीन सुमआमीन

Thursday, January 8, 2026

Are you thirsty & hungry for Love with Love from Love..??

मेरे दिल में यूँ तो बहुत कुछ है
आप जो समझें वही सबकुछ है 
❤️‍🔥💘❤️‍🔥
आपके देखे से वो बहुत कुछ, नाकुछ भी हो सकता है,
मेरे देखे से मगर वो नाकुछ का होना ही तो सबकुछ है 
💔❤️‍🩹💔
बस..., यही तो उस नाज़नीन की सोच-समझ में हल्की सी एक चूक है,
वो नादान अंजान इस बात से कि हमें किसकी कितनी प्यास है, भूख है
 💕😘💕
मेरे एकमात्र सच पर भी उसे न जाने क्यों होता बहुत बार शक़ है,
क्या कहूँ, कैसे कहूँ......, की मेरे कहते ही सच भी हो जाता झूठ है
💎🌹💎
वो समझती है कि मैं उसकी बातों को, जज़्बातों को बिल्कुल भी नहीं समझता,
वहीं मैं भी ये समझता हूँ कि वो मेरे हाल को, हालात को कतई नहीं समझती
बस, यहीं से हम दोनों के बीच एक वैचारिक जंग शुरू हो जाती है...
लय-ताल जो जो एक मधुर मिलन के लिए मिली थी, खो जाती है... 
और ऐसा हादसा एक बार नहीं, कई बार, बार-बार होता है...
सोच-समझ की सुई फिर वहीं जाकर अटक जाती है जहाँ से जवानी को तुरपाई की जरूरत महसूस हुई थी
दो जिस्म, दो दिल बुनने चले थे जो रिश्ता वो लिबास खो जाते हैं, 
सीने चले थे जो तन मन धन को वो खुद ही ज़ख्मी हो जाते हैं,
साथ चले थे जो दो राही वो एक अलग ही राह अपना लेते हैं...
मंज़िल तक पहुंचने से पहले ही दो मतवाले रास्ते से भटक जाते हैं...
🤫🤐🤫
फिर वही तन मन धन की बेचैन प्यास तड़पती है, तड़पाती है,
बरसों पुरानी एक मनमोहक कहानी फिर प्यास बन तरसाती है,
एक फांस है जो चुभते ही नासूर सा एक ज़ख्म बन जाती है,
वक्त उस दर्द को बहला-फुसला कर एक आशा जगा देता है,
एक उम्मीद की किरण उस प्यार के दर्द को मीठा बना देती है,
मनी फिर अपनी प्यास बुझाने के लिए निकल पड़ता है किसी कस्तूरी की तलाश में,
कस्तूरी फिर मचल उठती है मनी की भूख-प्यास को तृप्त करने के लिए...

"कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढे बन माहि। 
ऐसे घटि घटि राम है, दुनिया देखे नाहीं।।"

(कस्तूरी कुंडल बसे मृग" एक प्रसिद्ध कबीर दोहा है जिसका अर्थ है कि जिस तरह कस्तूरी हिरण अपनी नाभि में स्थित कस्तूरी (सुगंध) को जंगल में ढूंढता फिरता है, उसी तरह मनुष्य भी ईश्वर को बाहर मंदिरों और तीर्थों में खोजता है, जबकि वह हर कण में उसके भीतर ही मौजूद है, जिसे उसे अपने अंदर झाँक कर खोजना चाहिए, यह दोहा हमें आत्म-खोज और आंतरिक ज्ञान के महत्व को सिखाता है)

Aameen summa aameen

Sunday, December 14, 2025

Thirsty Mind

तिश्नगी जल की हो, थल की हो या हो तल कि..
तृष्णा हुस्न की हो, जिस्म की हो या हो शबाब की..
माया धन की हो, वैभव की हो या हो नाम की..
मिटती है ना मिटाती है, ना ही मिटने देती है...
प्यास लगती है, लग आती है, जगती है, जगाती है, जलती है, जलाती है, उठती है, उठाती है पर बुझती नहीं..

💦 😍 🍷 

Bar Bar Her Bar 
घर-बार Car-o-Bar 
  बार-बार, हर बार, 
चरम आनंद, चरम सुख,
  चमत्कार चमत्कार

😜💘😜
Happy Sunday Times

Wednesday, December 10, 2025

एक रास्ता दो राही

हमने कहा:

जो उम्र भर ना मिले...

उसे उम्र भर चाहना ही इश्क है...

💘

जवाब आया:

मुझे इंतज़ार करना आता है,
बस तूम लौटना सीख लो !!

💘

सबकुछ लूटा कर लौटे जो हम अपने ही मुकाम पे...,
 
पाया कि अब भी धड़कता है दिल उसी अंजान पे..!!

💘

उनका इश्क़ उनकी तरह रूहानी,
मेरा जुनून मेरी तरह तूफानी...,

मेरे प्यार का तरीका उन्हें नहीं भाता,
उनकी तरह प्यार करना मुझे नहीं आता..!!

💞💓💞

Thursday, October 30, 2025

भूखे पेट भजन ना होए गोपाला 🤪

https://youtu.be/cxJ6EKDgsMk?si=D7Dx8taM5mh091d2

ना मैं योगी
ना मैं भोगी
ना मैं रोगी
ना मैं द्रोही
मैं तो बस एक प्रेमी रे
कृष्ण कृपा और कृष्ण इच्छा
मोहे जो चाहे वो बनाए
कभी भूखा
कभी प्यासा
कभी आशा
कभी निराशा
प्रेम अद्वैत के दर्शन कराए 
प्रेम ही बनाए अद्वीतीय
प्रेम ही खोजी बनाए
प्रेम ही करे है तृप्त
प्रेम प्रेम से प्रेम को अपनाए
प्रेम ही प्रेम से प्रेम को करे संतुष्ट
प्रेम महज एक भावना नहीं
प्रेम महज एक ख्याल नहीं
प्रेम महज किताबी ज्ञान नहीं
प्रेम अवधूत प्रेम अदभुत 
प्रेम प्रयोजन प्रेम संयोजन 
प्रेम वर्तमान भविष्य भूत 
प्रेम ही कर्म करवाए
प्रेम न माँगे फल या सबूत

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ,
पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का,
पढ़े सो पंडित होय ।।

Thursday, September 25, 2025

नवाज़िशें

मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था
वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था
- अंजुम रहबर

अब हमें देख के लगता तो नहीं लेकिन
हम कभी उसके पसंदीदा हुआ करते थे
~जव्वाद शैख़

ये वहम जाने मेरे दिल से क्यूँ निकल नहीं रहा
कि उस का भी मिरी तरह से जी सँभल नहीं रहा 

कोई वरक़ दिखा जो अश्क-ए-ख़ूँ से तर-ब-तर न हो
कोई ग़ज़ल दिखा जहाँ वो दाग़ जल नहीं रहा...

~अज्ञात

तुमसे मिलकर इतनी तो उम्मीद हुई है
इस दुनिया में वक़्त बिताया जा सकता है

- मनोज अज़हर

पसंद में आज भी तुम हो
 बस बताने वाले में दम नहीं है..!!
वो चाहे जो कहे, 
 उसे मिला कोई हमसा नहीं है..!!

#आशा

हम अपनी जीत के क़िस्से भी सुनाएँगे कभी
अभी तो हार के अफ़साने बयाँ होने दो 

- हरिओम

Wednesday, September 10, 2025

रंग-बेरंग

झूम के आती है 
घूम के आती है 
छम से आती है 
छान के जाती है 

रुक के आती है
ठहर के जाती है
थम के आती है 
थाम के जाती है

वक्त पे आती है
बेवक्त जाती है
होश में आते ही
बेहोशी छा जाती है

जोर से आती है
शोर मचाती है 
जम के आती है 
जाम पिला जाती है 

ये ज़िंदगी है जो मोहब्बत बन कर आती है
वो मोहब्बत है जो ज़िंदगी बन जाती है 


दिल्ली वाली चाय

दिल्ली वाली चाय और दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड की बात ही अलग
एक अदरक वाली है तो दूजी नखरे वाली; दोनों का अंदाज़ है गौरतलब

तलब लग जाए तो मुँह लगाना कतई नहीं गलत
मुँह लगते ही हॉट फीलिंग्स भी होती है वाक़ई ग़ज़ब

दिल वालों से दिल्लगी करना तो करना थोड़ी अजब
ऐं वें तो ना ये हलक से उतरें ना फ़लक की डेट तलक

चढ़ जाएं जो सर पे तो माथा जाता है ठनक
सोच समझ कर ही चुस्की लेना बिना सनक
वैसे सी...सी करते हुए इन्हें गरमागरम कर पीने का मजा ही अलग..
😜😘😜
दिल से लेना 
दिल से देना
बिल फट जाए तो कहना कि दिल्ली वाली चाय और दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड की बात ही कुछ अलग 
😜😘😜

Wednesday, September 3, 2025

Abusive language - अभद्र भाषा, गाली-गलौच

गाली माँ की हो या माँ को दी जाए
मुख देने वाले का ही सड़ता है
गाली खाने वाले काम ही क्यों किए जाएँ 
गालियों से भला किसका पेट भरता है

🙊🙉🙈

आपकी भाषा बता देती है की आप कितने सनातन संस्कारी हो
Your language tells how civilized you are
आपका लहज़ा आपकी दिमागी हक़ीक़त बयान कर देता है
Your tone highlights your current status
खुदाया, कब तक छिपाओगे ख़ुद को ख़ुद की खुदी से
Gosh, until when will you hide your ego from yourself
सुना है, ख़ुदा शब्दों से ज़्यादा नीयतों की नमाज़ सुनता है
I have heard that God pays more attention on deeds and intent than mere words

Monday, September 1, 2025

बुरहानपुर स्टेशन

https://youtu.be/DrFD-JDCGT8?si=L8-f0Q5JoPLJka1B

*महज़ एक स्टेशन नहीं था वो स्टेशन:*

यादें साधु और पान-पट्टी की आज भी जवान हैं वहाँ...

चाय-कचौरी के लाजवाब स्टाल की सुगंध तड़पाती है आज भी...

पापा और उनके सहकर्मियों का सुट्टा बार भी हुआ करता था वो लालबाग का स्टेशन...
 
पठानकोट एक्सप्रेस और पंजाब मेल के आने-जाने के बीच कराता था चंगी कुड़ियों के दीदार भी वो स्टेशन...

जाने ज़िंदगी में दुबारा कब आएगा हसीन यादों का वो प्राचीन मगर दुर्लभ सा एक स्टेशन...

😜

Tuesday, August 26, 2025

Sleeping with Dog

सुना है, कुत्तों के साथ सोना इंसानी सेहत के लिए अच्छा होता है 
🐶🐕🐶 
कुत्तों के लिए भी तो मालिक के आगे दुम हिलाना जरूरी होता है 
🐶🐕🐶 
सोना अगर मालामाल होने का परिचायक है तो दुम हिलाना वफ़ा का
🐶 🐕🐶
(God is dog spelled backwards)
ये महज़ इत्तेफ़ाक नहीं, संकेत इसमें पवित्र साथी का भी होता है
🐶🐕🐶

पता नहीं..
शोले का वीरू फिर बसंती को कुत्तों के सामने नाचने से मना क्यों करता है
🤔🤔🤔
पता नहीं..
बसंती जब उसकी नहीं सुनती तो वीरू कुत्तों का खून पीने की बात क्यों करता है


🙈🙉🙊

Tuesday, August 19, 2025

जिस्म और रूह

#रूह 

जिस्म को जिस्म की ही जरूरत होती है
जिस्म चाहने वाला जिस्म ही तलाशता है

रूह को रूह की ही जरूरत होती है
रूह रुह को ही तलाशती है

जिस्म उपरी तौर पर ही प्रेम करता है.. मगर..
रूह रुह की गहराई में उतर जाती है

जिस्म से प्रेम करने वाले अक्सर ही धोखा
दे जाते हैं…
मगर… रूह से प्यार करने वाले ही रिश्ता
निभा जाते है..

✍️🌹 ©अनीता अरोड़ा


#जिस्म और रूह

जुदाई का आलम नहीं जानते जिस्म हो या रूह
खुदी को कबूल ले ख़ुदा की खुदाई की तरह

ज़िंदा जिस्म में ही ज़िंदा रहती है कोइ भी रूह
हाँ...दिखाई नहीं पड़ती वो भी मन ही की तरह

साँसों के दम पर ज़िंदगी होती मौत से रू-ब-रू
रूह-जिस्म संग जीते-मरते हैं प्रेमियों की तरह

दो में से एक को चुनता नहीं कोई भी सुर्खरू
चुनाव पक्षपाती हैं बेबस मतदाता की तरह

तोड़-मरोड़ लो या कर दो उन्हें तुम बेआबरू
रोड़ा अटका रहेगा गुलाब में काँटों की तरह

सुना है के जिस्म दफ़न हो जाते हैं पर मरती नहीं है रूह
जिस्म के बाज़ारों में रूह को मरते हुए देखा है ज़मीरों की तरह 

✍️🌵 ~दीवाना वारसी

Monday, August 18, 2025

काम का संगीत

वो बातें जो तुम्हारी तस्वीरों से अकेले में कहीं करता हूँ ना मैं..
वो बातें तो बस एक दीवाने की नाकाम सी क़वायद होती है 😊
हक़ीक़त में जब तुम्हारी नज़रों से नज़रें चार करता हूँ ना मैं..
काम की बात नहीं बस ऊलजुलूल सी एक बकवास होती है 😊 

नज़रें मिलती हैं तो बात नहीं कर‌ पाता हूँ मैं...
दो काम एक साथ नहीं ना कर पाता हूँ मैं 😜

गा कर ही कहूंँगा कभी मैं तुझसे अपने दिल की बात..
यूँ तो लड़खड़ा जाती है ज़ुबान जब कुछ कहने जाता हूँ मैं 😜

संगीत ही करेगा मदद
बदन तेरा होगा साज़ 
होंठ करेंगे अपना काज
उंगलियाँ थिरक उठेंगी
संगीतमयी होगी आग
🔥 🔥 🔥
आँखें देखेंगी तेरा गुलबदन
स्पंदित होगा नाच
चंदन सा बदन, चंचल चितवन
प्रेम का दर्द, मीठा स्वाद
😋 😋😋

रंगमंच और रंगकर्मी

दुनिया एक रंगमंच है और इस रंगमंच ने हमें सबकुछ भरपूर, अनायास और बेशक दिया है..

मेरा-तेरा, अपना-पराया, ये-वो के द्वैत से ऊपर उठकर जो देखो तो साफ दिखाई पड़ता है..
 
की..

मालिक ने दो आलमों पर मालकियत जताने का हक़ तो शायद ख़ुद को भी नहीं दिया है..
🪔 
अप्पो दीपो भवः

Thursday, July 31, 2025

नज़र नज़र की बात है जी...


[7/31, 10:00 AM] 
Salim: Kya dekhte ho darling..?? 😜

[7/31, 10:20 AM] 
Manish Badkas:
जब भी गतिमान मोबाइल कैमरे की आँख में झांँककर देखता हूँ तो वहीं पुराने दिन, खूबसूरत पलछिन, बचपन के यार, हँसी-ठिठोली, वो पहला प्यार, वो बहार, वो दुलार, वो जीत, वो हार, वो मरासिम, वो तकरार, वो...
वही रंगीन नज़ारे, वही मैदान, वही ज़लज़ले नज़र आते हैं, सलीम भाई...,

स्थाई आईने की नज़र से देखता हूँ तो लगता है कितना बदल गया है ना सबकुछ - मैं, मेरे आस-पास के लोग, मेरी तमन्नाएंँ-मेरी ख्वाहिश, मेरा चेहरा, मेरे सपने, मेरा समाज, सामाजिक वातावरण, और भी बहुतकुछ...
पर दिल अब भी वैसा ही नादान बच्चे जैसा नज़र आता है, सलीम भाई..!!

(मोहम्मद सलीम मेरे बचपन के यार, मेरे सहपाठी, मेरे जिगरी दोस्त हैं)

Tuesday, July 8, 2025

याद है..??

मनाया तो था तुम्हें पर वैसे नहीं जैसे तुम मानती हो
शायद तुम्हें याद नहीं..

नखरे भी उठाए थे हमने तुम्हारे पर कभी गिनाए नहीं
शायद तुम्हें याद नहीं..

हाथ थामा और हक़ जताया तो तुम उसे व्यभिचार समझीं 
शायद तुम्हें याद नहीं..

सुलझाने वाला खुद ही तुम्हारी रेशमी बातों में उलझ गया
शायद तुम्हें याद नहीं..

https://x.com/WeYoSahitya/status/1941776632630386746



Sunday, June 1, 2025

अंतरात्मा की आवाज


उसकी जुल्फों से आती है dove शैंपू की भीनी-भीनी खुश्बू...,
मेरी हसीन माशुका मुझे बूढ़ा नहीं होने देती..!!

पचपन में भी दिखा देती है मुझे मेरा बचपन....,
मेरी नादानियांँ मुझे जवान नहीं होने देती..!!

पचास के मोड़ पर भी वो लगती है कमसिन...,
मेरी दीवानगी मुझे बुजुर्ग नहीं होने देती..!!

नस नस और अंग प्रत्यंग में दौड़ता है लहू...,
तन बदन की आग होश में रहने नहीं देती..!!

ख्वाबों में आ आ कर तड़पाता है जोबन...,
मचलते अरमान रात भर सोने नहीं देते..!!

मनी के मनु में भर देती है वो उमंग और उत्साह...,
मेरी अंतरात्मा मुझे बुढ़ापा महसूस होने नहीं देती..!!
                          ~ दीवाना वारसी

Sunday, March 16, 2025

नोक-झोंक


वो शे'र ही क्या जिसमें नोक-झोंक न हो
वो ज़िंदगी क्या जिसमें जोक-शौक न हो

मेरी चुहलबाज़ी को मेरी पहल समझते हैं वो
वो आशिक़ी क्या जिसमें नोक-झोंक न हो

छेड़खानियाँ मेरी अब भी चौंका देती है उन्हें
वो मुहब्बत क्या जिसमें रोक-टोक न हो

आप ही की तस्वीर है इन आँखों में 😍
कभी निहारती है टुकुर टुकुर चुपके से 🫣
तो कभी बंद हो जाती है हौले से 😜
शर्मा जी से करीबी रिश्ता है इनका 🫣
मिलते ही गले जो पड़ जाती हैं वो 🤗

हँस देती हैं वो मेरी हर बात पर 
वो दोस्ती क्या जिसमें हँसी-मज़ाक न हो

खिलखिला उठती है वो दोस्ती के नाम पर 
वो रिश्ता क्या जिसमें लोक-लाज न हो

रोके रखती है वो ख़ुद को डूब जाने से
वो हसरत क्या जिसमें जज़्बात न हो

कुछ नहीं कहकर सबकुछ कह देती है वो
वो बात ही क्या जो बेबाक न हो

ज़िंदादिली पर लगा है आवारापन का ठप्पा
वो दिलदार क्या जो दिलफेंक न हो

Tuesday, January 28, 2025

ज़िंदगी, आशा और उम्मीद


"सुना है कहीं की हर एक की ज़िंदगी में एक ऐसा वक्त आता है जब उसे फैसला लेना होता है कि पन्ना पलटना है या किताब बंद करनी है"

किताब पढ़ते वक्त पन्ने पलटना होते हैं
पन्ने पलटते वक्त अश'आर अधूरे से होते हैं
किताब बंद करते वक्त एक पन्ना मोड़ देता हूँ 
बंद किताब खुलते ही जिंदा जो हो जाती है

आशा करता हूँ कि उम्मीद पूरी होगी

आशा और उम्मीद में अंतर यह है कि आशा सिर्फ़ इच्छा है, जबकि उम्मीदें मांग करती हैं. उम्मीदें अक्सर किसी तर्क पर आधारित होती हैं, जबकि आशा के लिए किसी तर्क की ज़रूरत नहीं होती।

ज़िंदगी एक अज्ञेय, एक अबूझ किताब सी लगती है, ए दोस्त,
पन्ने पलटते पलटते अध्याय बदल जाते हैं...

एक अध्याय खत्म होते ही दूसरा अध्याय शुरू हो जाता है...

एक कहानी या किताब पूरी होते ही कई अनुत्तरित सवाल छोड़ जाती है...

बस, उन्हीं सवालों के जवाब खोजने हेतु एक नई किताब फिर खुल जाती है...

ज़िंदगी एक ऐसी अदभुत और अविश्वसनीय किताब जो कभी ख़त्म नहीं होती...

Wednesday, January 22, 2025

मौसम और मिजाज़

दिल तड़पता रहा हम तड़पते रहे
सारी रात चांद को तकते रहे 
तेरी याद में सोये नही रातभर
सितारों से ही बातें करते रहे..

सुबह हुई तेरे नाम से
आँखों के एहतराम से
सलाम किया जज़्बातों ने
दिन कटेगा सपनों में..

दोपहर की बात ना कर
आठों पहर ये कहर
शाम के करवट लेते ही
फिर वही रात का सफर..

तुम्हारे साथ मौसम फरिश्तों जैसा
तुम्हारे बिना वही मौसम गमगीन
जादू तुम्हारा है मोहब्बत जैसा
तुम जो हसीन तो समा भी रंगीन..

अनकही बातें


बहुत कुछ पा लिया लेकिन अधूरापन नही भरता... किसी से ऊब जाते है...किसी से मन नही भरता...

एक सिलसिले की उम्मीद थी जिनसे वही फासले बढ़ाते चले गए..
हम तो पास आने की कोशिश में थे जाने क्यूं वही दूरियां बढ़ाते गए..

Wednesday, January 1, 2025

Happy New Year

स्वीकार करो या मत करो
जो है, जैसा है, वैसा है
वो तो है...
ऐसा हो, वैसा हो, तो जाने कैसा हो
ऐसा होना चाहिए, वैसा होना चाहिए
समय को हर बिंदु पर ध्यान देना चाहिए...
ऐसा होता तो कैसा होता,
वैसा होता तो कैसा होता,
इन सब मनोकामनाओं के पार...
जैसा है, वैसा है
सतत् है, अमर है, सनातन है...
अब तुम्हारा मन उसे अंग्रेजी वर्ष कहकर
स्वीकार करे या ना करे
वो तो है...
जैसा है, वैसा है 
😜🫶😜
Happy Happy 2025 💯
Be happy - Stay happy 😊 
Let happiness come without a Y 💓

Thursday, December 26, 2024

ज़िंदगी की लड़ियां

ज़िंदगी की बगिया में फूलों की खुश्बू भी है और है काँटों सी चुभन भी,
जीवन संगीत में षड्ज, ऋषभ, गंधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद भी,
कभी फूलों से दिल लगा लिया तो कभी काँटोँ को मन में बसा लिया,
सात सुरों से दिन-रात खेलते हैं संगीतज्ञ और पा लेते हैं सम संसार भी।

जय हो
   🙏
ॐ नमः शिवाय

Friday, December 13, 2024

आँखें





आंखों का स्पर्श कभी-कभी,
शब्दों से भी गहरा होता है
आँखें चुभती भी हैं
आँखें सजती भी हैं
आँख मारी भी जाती है
आँख उतारी भी जाती है
आँखें आती हैं
तो जाती भी होंगी
आँखें निहारती हैं
तो इतराती भी होंगी 
आँखें बहती भी हैं 
आँखें सहती भी हैं 
आँखें डराती हैं, धमकाती हैं
चमकती हैं, चमकाती हैं
आँखें इधर-उधर मंडराती हैं जब
शामत सी आ जाती है तब
आँखें बंद भी हो जाती हैं
आँखें खुल भी जाती हैं
आँखें उदास हो जाएं तो 
आँखें नम भी हो जाती हैं
आँखें इशारे कर जाएं तो
आँखें शर्माती भी हैं
आँखें तरेर दे कोई तो
आँखें लाल भी हो जाती हैं
आँखें मिल जाएं तो 
आँखें खिलखिला उठती हैं
आँखें शर्मसार हो जाएं तो
आँखें झुक भी जाती हैं
आँखें खिल जाएं कभी तो
कभी भर भी आती हैं
आँखों-आँखों में बात हो जाए तो
आँखों-आँखों में इकरार हो जाए तो
नज़रें मिला कर नज़रें उतारनी भी पड़ती हैं
आँखों की मस्तियाँ भी हैं, शोखियाँ भी हैं, और है गुस्ताखियाँ भी
आँखों के दीवाने भी हैं, परवाने भी हैं, और हैं कई अफसाने भी
नज़रों की ये जो सौगात है
नज़र नज़र की बात है
छू जाएं गर तुम्हें तो नज़राना 
ना छू पाएं गर तुम्हें तो पर्दा
छू लेने दो अगर तुम तो उल्फ़त आशिक़ाना 
छू लो अगर तुम तो अंदाज़-ए-बयां क़ातिलाना..

Thursday, December 12, 2024

मन चाहा इंसान

*अपने आप को नेक इंसान बनाएं*
(गीता जयंती पर विशेष)

👉महाभारत का सार मात्र दस पंक्तियों में समझें !!

*~ चाहे आप हिन्दू हों या किसी अन्य धर्म से।
*~ चाहे आप स्त्री हों या पुरुष।
*~ चाहे आप गरीब हों या अमीर।
*~ चाहे आप अपने देश में हों या विदेश में‌।

संक्षेप में,यदि आप मनुष्य हैं तो नीचे दिए गए महाभारत के अनमोल *१० मोती* अवश्य पढ़ें और समझें:-
1- यदि आप समय रहते अपने बच्चों की अनुचित माँगों और इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रखते, तो आप जीवन में असहाय हो जाएँगे... *"कौरव"*
2- आप कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों,यदि आप अधर्म का साथ देंगे,तो आपकी शक्ति, शस्त्र,कौशल और आशीर्वाद सब बेकार हो जाएँगे... *"कर्ण"*
3- अपने बच्चों को इतना महत्वाकांक्षी न बनाएँ कि वे अपने ज्ञान का दुरुपयोग करके सर्वनाश कर दें... *"अश्वत्थामा"*
4- कभी भी ऐसा वचन न दें कि आपको अधर्मियों के सामने समर्पण करना पड़े... *"भीष्म पितामह"*
5- धन,शक्ति,अधिकार और सत्ता का दुरुपयोग गलत काम करने वालों का साथ अंततः पूर्ण विनाश की ओर ले जाता है... *"दुर्योधन"*
6- सत्ता की बागडोर कभी भी अंधे व्यक्ति को न सौंपें अर्थात जो स्वार्थ,धन,अभिमान,ज्ञान, आसक्ति या वासना से अंधा हो, क्योंकि इससे विनाश होगा... *"धृतराष्ट्र"*
7- यदि ज्ञान के साथ आत्मबल और बुद्धि भी हो तो आप अवश्य विजयी होंगे... *"अर्जुन"*
8- छल-कपट से आपको हर समय सभी मामलों में सफलता नहीं मिलेगी... *"शकुनि"*
9- यदि आप नैतिकता,धर्म और कर्तव्य का सफलतापूर्वक पालन करते हैं,तो दुनिया की कोई भी शक्ति आपको नुकसान नहीं पहुँचा सकती... *"युधिष्ठिर"*
१०- अपनी ज़ुबान, सुंदरता और मादकता को संयमित रखें वरना जुआरी आपको दांव पर लगा देंगे और भेड़िए आपको निर्वस्त्र कर देंगे। कृष्ण कृपा के योग्य बनें... *"द्रौपदी"*

"सर्वे भवन्तु सुखिनः
 सर्वे सन्तु निरामयाः।"

👉अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है। हम बदलेंगे,युग बदलेगा।

आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो।

🙏जय गुरुदेव🙏

Wednesday, December 11, 2024

Age ain't a taboo, is it?


अब जा कर पता चला हमें कि हम अब तक इतने दिलकश और जवान क्यों हैं,
दुनिया अगर हमें ठरकी या छपरी कहती है तो कहा करे, हमें क्या............

हमें तो मतलब सिर्फ उनसे, उनके लबों से और उनके अल्फाजों से है........,
अकेले में चुपके से कहते हैं वो की गुनाह करने की कोई उम्र थोड़े ही होती 💘

Thursday, December 5, 2024

हम और आप

ग़ज़ब की मुस्कान के साथ हर बोझ उठा लेते हो आप...,
~
बाखुदा स्वार्थ से पहले कर्तव्य को रखते हैं आप..!!

आप ही ने तो दामन थाम कर साथ चलना सिखाया था कभी...,
~
आप अब भी तो एक रहनुमा सा साया बन मेरे साथ चलते हो..!! 

ॐ साईं राम 
जय जय माँ 
🙏🌹🙏