A Whatsapp message politely greets you and says:
Limited Desires,
Unlimited Peace.
On the face of it the bookish WhatsApp University message of knowledge appears to be a visionary wisdom but doesn't seem to be practical or pragmatic in real life execution of it.
Let's analyse the phenomenon:
No Desires,
No Life - Only Breaths
How?
1. Desires are quintessential part of life.
2. Desires don't disturb our peace but their fulfilment or non-fulfilment does.
3. Fulfilled desires bring happiness.
4. Unfulfilled desires bring sorrow.
5. To wish or to desire is quite natural, quite human but to get stuck with its fulfilment is obstinacy.
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि
~ श्लोक from गीता
अर्थ:
मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल पर नहीं। इसलिए, फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य करते रहना चाहिए।
व्याख्या:
१. कर्मों का जन्म इच्छाओं से ही होता है वर्ना तो मनुष्य अकर्मण्य हो समाधिस्थ या स्थित प्रज्ञ हो संतत्व प्राप्त कर सकता है।
2. सामान्य सामाजिक मनुष्य का सिद्ध तपस्वी हो जाना कोई किताबी ज्ञान होने की बात नहीं।
3. अकर्मण्यता का मतलब आलस्य नहीं हो सकता
4. कर्म करने या न करने (कर्मण्यता, अकर्मण्यता या आलस्य) में भी कोई आसक्ति नहीं होनी चाहिए।
तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा,
दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँ इतने हिजाबों में मिलें
~अहमद फ़राज़
हाँ...अगर किसी की किसी से मिलने की या मिलन की इच्छा ही न हो तो बात अलग।
एक साधारण मनुष्य होने के नाते मेरी तो इच्छाएँ हैं और मरते दम तक रहेंगी। हाँ, इच्छाओं की पूर्ति होने या ना होने पर मेरा कोई ज़ोर, हक़ या काबु नहीं है - ये सत्य मुझे पूर्णतः स्वीकार है।
इच्छाओं से उपजे कर्मों से फ़ल की प्राप्ति होनी ही चाहिए या होगी ही - ऐसी भी मेरी कोई इच्छा नहीं और शायद इसीलिए मेरी इच्छाएँ मुझे विकृत, विफल या अशांत नहीं करतीं।
.
. ख्वाब झूठे है और ख्वाहिशें
. अधूरी है पर जिंदा रहने के लिए
. कुछ गलतफहमियां भी तो
. जरूरी हैं l
प्रेम से प्रेम के लिए प्रेम बना रहे
🫶🤌🫶
[अगर कोई आपसे मन की बात साझा ( Share) करता है तो...
समंदर बनना समाचार पत्र (Newspaper) नहीं...!!]
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