Thursday, June 25, 2026

Nature


तुम नारी - में पुरुष
तुम हुस्न - मैं आशिक
तुम चाँद - मैं सूरज
तुम धरती - मैं गगन
इश्क़ मगर हमें एक कर देता है उस एक से
जो शक्ति भी और है शिव भी

लगता है कि ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है हम में - तुम में...,
~
शायद इसीलिए हम मिलते तो हैं क्षितिज पर मिलन हमारा होता नहीं..!!

एक बारिश ही है जो गरजते आसमान को ज़मीन से मिलाती है 
देखो ना दिल की धरती कैसे खिल उठती है और महक जाती है

संवाद, संवाद केवल एक बातचीत का माध्यम न होकर,
एक ऐसा मानसिक पूल है जो मनुष्य को मनुष्य से जोडता है....
🫶💘🫶
कैसे, कब, कहाँ, क्यों ये तो खैर प्रेम ही तय करता है

नमस्कार 🙏

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