Wednesday, September 30, 2026

एहसास ए इश्क़

इश्क़ वो नहीं जो सिर्फ़ हासिल हो…

कुछ मोहब्बतें पाने के लिए नहीं, उम्रभर महसूस करने के लिए होती हैं… ❤️🌸

१. ज्ञानेन्द्रियाँ और स्पर्श, 
२. मानसिक एकाग्रता,
३. स्वीकृति और खुलापन
ये मुख्य आधार होते हैं *महसूस* करने के लिए
इनमें से एक भी ना हो तो *एहसास* पूर्ण नहीं होते 
💯💞💯

उम्रभर ज्ञानेन्द्रियों ने एकाग्र हो महसूस किया है तेरे मधुर स्पर्श को...
दिल खोल कर स्वीकार है वो सालभर में एक बार पलभर का मिलन...
~
ज़िंदगी ख़्वाब ही सही, जी लेंगे हम..
प्यार के दो बोल ही सही, पी लेंगे हम..
सनम तेरी कसम ❤️‍🔥

एहसास और महसूस में बस फ़र्क है इतना
"वो पास न होकर भी मेरे पास बहुत है"

या यूँ समझो कि;
"एक रूह में उतरा है, एक जिस्म छू के गुज़रा है"

या यूँ कह दो 
"कि वो ज़ुबाँ तक नहीं आता, पर आँखों में दिखता है"

ज़मीन (मिसरा) तो एक ही है पर आसमाँ अलग है 

Saturday, September 26, 2026

Love or Lust

*Is Spirit Loving in nature or is it stoic?

Spirit has to be loving in nature or else it's just a knowledgeable and pretentious state of mind.

Surely, soul has no gender but then our God given body has a definite gender.

Think of a feminist world where there are no men; only women 
or
Think of a masculine world where there isn't any women.

What a dull, listless and pathetic world it would be!

God is unique and so is His creation. Unity in Diversity is the spice of life. 🧬 

No, I am not at all embarrassed of my being, my sexuality, my basic instincts, my natural urge and desires, are you?

हाँ, मेरा शरीर मर्द का है और मुझे मेरे प्रभु ने मुझे काम वासना, मोह माया, रति अहंकार के साथ बनाया है। 
उसी प्रभु ने मुझे आत्म ज्ञान और आत्मा भी दी है जो मुझे काम क्रोध मोह माया अहंकार का गुलाम होने से रोकती है। अति सर्वत्र वर्जियते। फिर चाहे वो ना नुकुर से भरी नास्तिकता हो या भोग विलास से भरी आस्तिकता हो।

Balance ⚖️ is the virtue of living a balanced life and you being a human being born out of Love which people term or tag it as Sex or Lust, you must be aware of it.

I know you are aware, my twin soul.
💘

Thursday, September 24, 2026

दीवाने की दीवानगी

बरसात में कुछ कुछ होता है ना
कल हो ना हो पर आज तो होता है ना 
क्या होता है ये कभी किसी से मत पूछना
होते होते ही तो प्यार जवाँ होता है ना 

प्यार जवाँ भी हुआ और परवान भी चढ़ा,
जवानी दीवानी भी हुई और सर भी चढ़ी,
प्रौढ़ अवस्था में वही प्यार इश्क़ बन गया,
देखते हैं वृद्ध अवस्था क्या गुल खिलाती है

वो कहती है कि बातों से अब भी प्रेम की महक आती है,
बरसात आज भी आहट बन उस महक को छेड़ जाती है

Uffff... ये प्यार, ये जज़्बात, ये हालात.. 
बेशुमार है इश्क़ पर सनम साथ नहीं

उसकी ख़ामोश ज़ुबान भी वो कह देती है मुझसे जो उसके अल्फाज़ चाहकर भी कह नहीं पाते...,

अकेले में होंठ मिलते हैं जब हमारे तो बिन कुछ कहे ज़ुबान टटोल लाती है राज़ सारे के सारे..!!

कर्तव्य और अनुशासन ही पहचान है सच्चे आशिक़ों की;
वरना तो कौन रोक सका है भला दो प्रेमियों को मिलने से

ख़्वाबों को हकीक़त बनने में वक़्त तो लगता ही है,
कौन कहता है की सवेरा होने में वक़्त नहीं लगता।

~दीवाना वारसी 

दीवाने की दीवानगी भरी एक पेशकश - कबूल फरमाइए हुजूर