कल हो ना हो पर आज तो होता है ना
क्या होता है ये कभी किसी से मत पूछना
होते होते ही तो प्यार जवाँ होता है ना
प्यार जवाँ भी हुआ और परवान भी चढ़ा,
जवानी दीवानी भी हुई और सर भी चढ़ी,
प्रौढ़ अवस्था में वही प्यार इश्क़ बन गया,
देखते हैं वृद्ध अवस्था क्या गुल खिलाती है
वो कहती है कि बातों से अब भी प्रेम की महक आती है,
बरसात आज भी आहट बन उस महक को छेड़ जाती है
Uffff... ये प्यार, ये जज़्बात, ये हालात..
बेशुमार है इश्क़ पर सनम साथ नहीं
उसकी ख़ामोश ज़ुबान भी वो कह देती है मुझसे जो उसके अल्फाज़ चाहकर भी कह नहीं पाते...,
अकेले में होंठ मिलते हैं जब हमारे तो बिन कुछ कहे ज़ुबान टटोल लाती है राज़ सारे के सारे..!!
कर्तव्य और अनुशासन ही पहचान है सच्चे आशिक़ों की;
वरना तो कौन रोक सका है भला दो प्रेमियों को मिलने से
ख़्वाबों को हकीक़त बनने में वक़्त तो लगता ही है,
कौन कहता है की सवेरा होने में वक़्त नहीं लगता।
~दीवाना वारसी
दीवाने की दीवानगी भरी एक पेशकश - कबूल फरमाइए हुजूर