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तेरी एक मुस्कान पर कुर्बान कर दूँ मैं सारा जीवन..
पूछते हैं वो नाज़-ओ-अंदाज से की क्या बात है जी..??
बेबाकी से कहता हूँ मैं की...
वही बात है जो बरसों पहले उस बंगले की सीढ़ियों पर एक महीन मुस्कान, एक झलक, एक नज़र से शुरू हुई थी....
आज तक वो बात खत्म नहीं हुई है...
आज भी वही आग लगी हुई है...
जुम्मा था उस दिन..
शुक्र है की आज भी शुक्रवार है
शुक्राने ख़ुदा के की सलामत हमारा प्यार है
हाँ जी हाँ *Teen* (किशोर अवस्था) में तेरी एक झलक पाकर ही हुआ मैं १३ *तेरा*
ना स्कूल-कॉलेज एक, ना डोली-बारात एक, फिर भी लगाते हैं आशिक़ अबूझ *फेरा*
अफ़सोस ये कि हम दो आशिक *तीन तेरह हो गए*
[मुहावरा: 'तीन तेरह होना' का अर्थ है 'बिखर जाना' या 'तितर-बितर हो जाना' (जैसे 'घर में सामान तीन तेरह हो गया')]
ताज़्जुब ये के आशिक़ फिर से दो जिस्म एक जान हो गए
शुक्र है ख़ुदा का की बात अब तक बनी हुई है
वर्ना हममें तुममें तो ऐसी कोई बात ही नहीं है
Yesssss......
तो Let's celebrate our home coming someday.. some night
दो सितारों का हो मधुर मिलन किसी दिन, किसी रात...
आमीन सुमआमीन