व्हाट्सएप रुलाता भी है
कभी बैठे-बिठाये झगड़े-टंटे कराए ये ऐप
तो कभी उमंग और उत्साह से भर जाए ये ऐप
रोमांचित कर जाना तो जैसे इसके बाएँ हाथ का खेल
कसम से, अफ़वाह फैलाने में भी नहीं इसका कोई मेल
ज्ञान अज्ञान का तो जैसे समुचित भंडार है इसके पास
खोल कर ना देखूँ इसे तो मानसिक यंत्रणा और त्रास
आदि हो चुका हूँ अगर में इसका तो इसमें इसकी कोई खता नहीं
जलती शम्मा पर मर मिट जाना क्या परवाने का सनातन धर्म नहीं
WhatsApp तुम सलामत रहो, तुम जियो हज़ारों साल
हम दीवानों के पास न डाटा की कमी ना समय का अकाल
*जय हो तुम्हारी ओ मीडिया के लाल*
😊👍😊
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