इसीलिए तो प्रेमी हमेशा हमेशा का साथ चाहते हैं
एक दूजे में समा कर एक होना चाहते हैं
सच मगर ये की दो प्रेमी एक होकर भी एक कहाँ हो पाते हैं
दो जिस्म एक जान होने की ललक में खोते ही चले जाते हैं
तन बदन एक हो जाते हैं कुछ देर के लिए
साँसे एक हो जाती हैं कुछ पलों के लिए
एकात्म मगर होती है तो सिर्फ रूह
नग़मे वफ़ा के तो अधूरे ही रह जाते हैं
क्यों ना फिर थोड़ी देर के लिए ही सही ज़िंदगी को गले लगाकर जी भर के जी लिया जाए..
क्यों ना अमर प्रेम को देश, काल, परिस्थिति की सीमाओं में बाँधे बिना अमर ही रहने दिया जाए...
चलो इश्क़ लड़ाएं
चलो इश्क़ लड़ाएं
चलो इश्क़ लड़ाएं सनम
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