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Wednesday, January 11, 2023

दिमागी जंग



उस की उमीद-ए-नाज़ का हम से ये मान था
~
कि आप उम्र गुज़ार दीजिए उम्र गुज़ार दी गई
(कभी delete हो कर तो कभी इंतज़ार में)
😄
- जौन एलिया

तुम्हारा दिल मेरे दिल के बराबर हो नहीं सकता,
~
वो शीशा हो नहीं सकता, ये पत्थर हो नहीं सकता

दूरियां इतनी पुरजोर हैं दिमाग और दिल के बीच
~
की फासले शहरों के बीच नहीं मन-दीप के बीच हैं।

नजदीकियां ख्वाबों और ख्यालों में इतनी जबरदस्त 
~
की उमंगे हकीकत में बहिश्त होने से घबरा जाती हैं।

भावनाएं कर्मों में ना दिखे तो सिर्फ एक ख्याल बन के ही रह जाती हैं
~
ख्याल हसीन ही सही मगर हकीकत असल किस्सा बयान कर जाती है।

तुम्हारी ये सोच की तुम खुद आए हो हमारे पास बड़ी बद दिमाग है, अहंकारी है
~
हम दिल-ओ-जान से मानते हैं की हमें भेजा गया है एक दूजे को पूर्ण करने के लिए।

इल्जाम तुम पर नहीं तुम्हारी अहंकारी सोच-समझ पर, तुम्हारी अकड़ से है
~
फिर ये बात अलग की दिल की बातों से तुम्हारा रिश्ता ज़रा कमजोर सा है। 

शिकायत ही करनी हो तो अपने मन के मालिक से करो
~
वो ही तुम्हारे दिल के राज़ खोल सकें तो खोल के रखेंगे अब तो..

Tuesday, December 13, 2022

माया की छाया


मन है तो निराशा-आशा साथ चलेगी ही
नर हो तो मादा मायावी बन रास रचेगी ही

काम करोगे उसके काम का अगर
तो उसके जग में तुम्हारा नाम करेगी

ज्ञान का वो सेब जो चखा था माया ने कभी
टेंटुआ बन अटका हुआ है नर गले में अभी

तन-मन-धन का खेल बन गया है संसारी
नर हो तो मादा मायावी बन रास रचेगी ही

हुस्न की दीवानगी ये क्या रंग ले आई
हमने तो मांगी थी खुदा से उसकी खुदाई

निपुण हुए तो जीत भी जाओगे
सदगुनी हुए तो पार हो जाओगे
अवगुण चित्त गर धरे रहे मन में
चिंता की चिता जला ना पाओगे