Sunday, March 15, 2026

खोजी होय तो तुरंत मिली हूँ, पल भर की तलाश में

बुद्धजीवियों के मुँह से अक्सर सुना है मैंने की खाली हाथ ही आए हो और खाली हाथ ही जाओगे भी...,
बेशक, मोह माया के जाल से बाहर निकल कर संतुष्ट और सुकून भरा जीवन जीने का एक बेहतरीन मार्ग सुझाया है इन परम ज्ञानी ध्यानी लोगों ने..!!

मन मेरा जाने क्यों ये कहता है बारंबार कि कुछ तो होगा जो मेरे साथ आया है और मेरे साथ जाएगा...,
यूँ फिजूल में ही तो नहीं रचता कोई अपने ओंकार की टंकार और हुंकार से ये रसभरा मायावी जगत या सँसार..!!

माना जी माना, दिल से माना कि पूत सपूत तो क्यों धन संचय और पूत कपूत तो क्यों धन संचय...,
पर फिर ये राम रतन धन क्या है जिसे पाकर मीरा दीवानी हुई, कबीर हुए दास और बुद्ध हुए रत्नजड़ित हीरा..!!

मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले
हीरा पायो गाँठ गठियायो, बार-बार बाको क्यूँ खोले

हल्की थी तब चढ़ी तराजू, पूरी भई तब क्यूँ तोले 
सूरत-कलारी भई मतवारी, मदवा पी गई बिन तोले

हंंसा पाए मानसरोवर, ताल-तलैया क्यूँ डोले
तेरा साहब है घर मांही, बाहर नैना क्यूँ खोले

कहै 'कबीर' सुनो भाई साधो साहब मिले गए तिल ओले

Sunday, March 1, 2026

नज़्म ए ज़िंदगी



एक तो तुम इतराती बहुत हो,
उस पर जीने से कतराती भी बहुत हो..

जो ज़िंदगी है ना मेरी, वो बिल्कुल भी इतराती नहीं,
कतराना क्या होता है ये तो जैसे वो जानती ही नहीं,
खुल के जीती है और खुल के जिलाती है,
मन ही मन जलती भी है और जलाती भी है बहुत..

बेहोश ना हो जाऊं कहीं मैं ग़म ए ज़िंदगी के आईने देख,
इसलिए,
दिल खोल के ज़िंदगी के जाम वो चखती भी है और चखाती भी बहुत है..

तुम लेती हो हिसाब पल पल का तो वो देती हैं खिताब हर पल का,
तुम खिंचवाती हो तस्वीर किसी से तो वो खींचती है तस्वीर मेरी..

तुम गर अज़ाब हो तो वो भी नायाब है,
तुम अगर ख़्वाब हो तो वो भी माहताब है 

असल में तो हक़ीक़त को सपनों से भी उतना ही प्यार है जितना इश्क़ हुस्न को ख़ुदा की खुदाई से है,
फिर ये बात अलग की दुनिया की नज़रों में इश्क़ हकीक़त में हो या हो ख्वाब में - दोनों में जुदाई बहुत है।